बँटवारे का दुख इतना अपना क्यों लगा? पास्ट लाइफ रिग्रेशन में विश्वास और अमानत की कहानी

जिस बँटवारे को उन्होंने देखा तक नहीं था, उसका दुख इतना अपना क्यों लगता था? ऑनलाइन रिग्रेशन में पंडित जी से मित्रता, विश्वासघात और अमानत के सोने से जुड़ी दूसरी जीवन-कथा उभरी। शोक, बेटी के भविष्य और जीवनसाथी की बात सुनने की जिम्मेदारी पर एक विस्तृत कहानी।
पास्ट लाइफ रिग्रेशन: आँखों की रोशनी चली गई, बना रहा कर्ज़ का भयंकर डर

आठवीं कक्षा में उनकी आँखों की रोशनी चली गई। सरकारी अधिकारी बनने के बाद भी कर्ज़ या किसी का एहसान लेने का डर बना रहा। पास्ट लाइफ रिग्रेशन के दौरान उन्होंने ऐसे अनुभव देखे, जिन्होंने उन्हें अपने इस डर और जीवन में मिली ज़िम्मेदारियों पर नए सिरे से सोचने का अवसर दिया।
बार-बार विषाक्त और हिंसक रिश्ते क्यों मिलते हैं? पास्ट लाइफ रिग्रेशन की सच्ची केस स्टडी

एक महिला के जीवन में बार-बार हिंसक रिश्तों का पैटर्न क्यों दोहरा? इस सच्ची पास्ट लाइफ रिग्रेशन कहानी की में जानिए वह कार्मिक कड़ी, जिसने उसके वर्तमान जीवन के रिश्तों को गहराई से प्रभावित किया।